1
2
3
4
100

हमारा सबसे प्रेम कैसे हो सकता है? 

कोई भजन की पंक्ति सुनाएं जो इसी प्रश्न का उत्तर दे

कोई दृष्टांत या प्रकरण सुनाएं जो इसी संदर्भ में हो

जब हमारा प्रेम गुरु से होता है तो ही हमारा प्रेम सब से हो सकता है।

जो भी तेरा प्यारा हो वो मेरे दिल का प्यारा हो, 

प्रेम बहने लगा हर किसी के लिए

प्याली की मैचिंग


100

हमारे साथ जन्मजात से क्या था जो हमने खो दिया? गुरु के साथ वो हमें कैसे मिल रहा है?

हंसी और अच्छी नींद - यह दो चीजें हमें परमात्मा ने साथ देकर भेजी, बच्चा किलकारियां मारकर हंसता है, १०-१० घंटे सुख से सोता है। यह दोनों ही हमने खो दिए, बाहर से हंसने के लिए laughter classes लेते हैं, पर यह हंसी तो अंदर से आती है। इसे न कोई दे सकता है न ही कोई छीन सकता है, पर यह हमने खुद उजाड़ दी। 

अब गुरु हर बात में भलाई देखना सिखा रहा है, हर पल जीना सिखा रहा है - साथ लाए क्या थे जो चला गया, सब कुछ होता है, बस सब कुछ देखो और मज़ा लो।

"जो खो गया था मुझसे वापिस मुझे मिला है"

"खुशी दो जहां की मिलेगी यहीं से, लिए जाओ भक्तों गुरु की आशीषें" 

100

हमको वैरायटी पसंद है, इसलिए परमात्मा की सृष्टि में variety है, इसको उदाहरण सहित बताएं। इससे हमें गुरुजी क्या सिखाते हैं।

कोई भजन की पंक्ति इसी संदर्भ में सुनाएं


हमको variety पसंद है- हम एक से कपड़े नहीं पहनते, एक सा खाना रोज नहीं खाते, हमारा मूड एक सा नहीं रहता, घर की सेटिंग भी चेंज करते रहते हैं, हमको change पसंद है- कभी हंसते हैं, कभी सुखी, कभी दुखी होते हैं। परमात्मा ने इसलिए सृष्टि में variety रखी हैं - कोई दो व्यक्ति एक से नहीं हैं, सबके स्वभाव अलग अलग हैं।

हम अब अपने स्वभाव को गुरु के भाव से बदलें

सब हमारी मौज के लिए बनाया है। हम किसी बात में अटके नहीं, कोई कमेंट नहीं करें, उस बात को दिमाग में नहीं रखें क्योंकि सब बदल जाएगा।

दृष्टा बनो जगत के पर मुख से कुछ ना कहना

सभ में आही तू ओ साईं मू 


100

हमें सदा तौल कर क्या करना चाहिए? क्यूं? कैसे तौलना चाहिए? इस पर कोई दृष्टांत या प्रकरण या भजन की पंक्ति सुनाएं।

हमें सदा तौल के बोलना चाहिए। क्योंकि इसी में सुख समाया है। हमें अपने शब्दों को गुरु के बताए parameters से तौलना चाहिए, क्या यह बात बोलना जरूरी है? क्या बोलकर अगले को सुख मिलेगा? हम क्या समझकर बोल रहे हैं? 

जितना मौन में रहेंगे, अपने मनोभावों को जान सकेंगे, अपने को गुरु की बातों से साफ कर सकेंगे। कभी किसी के लिए कैसे भाव होते हैं, फौरन react करते हैं। 

मौन में रहने से शक्ति संचित होती है, हमसे गलत बोल नहीं निकलता, गुरु की बात से अपने को संभाल लेते हैं और मन साफ रहता है। मौन से हमारे रिश्ते मजबूत रहते हैं, प्यार बना रहता है। मौन से हम करम बनाने से बचते हैं।

"क्यूं बोला" - दृष्टांत

M
e
n
u