"जीवन इक संग्राम है" इस पंक्ति के भाव को उदाहरण सहित बताएं।
इससे कैसे बच सकते हैं? भजन की पंक्ति गाकर उत्तर दें।
यह शरीर मिला ही दंड स्वरूप है, इसमें कष्ट हैं ही। हमारे सब सुखों की पूर्ति नहीं होगी, सब कुछ किसी को नहीं मिलता। एक बच्चा भी जब पैदा होता है तो रोता है, यानि कोई कष्ट उसको भी सताता है। हर एक के जीवन में संघर्ष है - कभी शारीरिक, कभी आर्थिक, कभी पारिवारिक - कोई नहीं बचता है।
जब संग राम है तो संग्राम सताता नहीं है। गुरु की समझ से हम चलते हैं तो हम टूटते नहीं, हम उसमें भी मजबूती से प्यार से मुस्कुराते हुए रहते हैं।
कौनसी नई बात मेरे साथ हो रही है
बदलाव तो प्रकृति का नियम है, सब कुछ बदलेगा ही, यह बदलाव अच्छा है
मेरा कोई है नहीं - सब मिले हैं, सबसे प्रेम कर लो
वहां पर मन नहीं रखें, किसी में आस नहीं रखें, किसी से कुछ भी चाहे नहीं, क्योंकि सब कुछ पहले ही बना पड़ा है
कहत कबीर सुनो भई साधू, समय बड़ा बलवान है, दो पाटन के बीच में पिस रहा इंसान है, कील संग जो लग गया, उसे काल भी न खाएगा
सुख दुख धूप और छाँव रे, खेले पल पल दांव रे, जाना है जो पार दोनों से चढ़ जा गुरु की नांव रे
नाम तेरे ने हर मुश्किल को आसान कर दिया
इनका साथ मिले तो हर मुश्किल टल जाए, हो घनघोर अंधेरा मंजिल मिल ही जाए, बिन पानी नाव चला दे, सतगुरु तो बिगड़ी बना दें
"काग पलट गुरु हंसा कीन्ही"
काग और हंस में क्या फरक है? हँस की दो विशेषताएं बताएं जो एक ब्रह्मज्ञानी संत में होती हैं
काग- कौआ गंदगी की तरफ ही जाता है, थूक को चाटेगा।
हँस श्वेत है, पवित्रता, शुद्धता और शांति का प्रतीक है, और दूध और पानी को अलग कर सकता है। ऐसे ही ज्ञानी संत पवित्र, शुद्ध होते है और विवेकवान हैं जो सच और झूठ की पहचान रखते हैं।
सच यानि परमात्मा, और झूठ यह शरीर और इसके नाते, मेरे हैं। हम हर एक में भगवान का भाव ही रखें और किसी नाम रूप में नहीं अटकें।
माता मदालसा ने अपने सातवें पुत्र के तावीज़ में क्या लिखा? उनको क्या शिक्षा मिली?
इससे हमें क्या सीखते हैं?
जब भी जीवन में दुख आये तो संत की शरण में जाना। उसके भाई राज्य के हिस्से मांगने आए, उसने संत को बताया तो संत ने कहा, अच्छा है, तुम्हारा जीवन योगी का हो जाएगा, इतने दिन तुमने राज किया अब इनको करने दो, यह सब तो साथ नहीं जाएगा, तुम दे दो। उनको एकदम से ज्ञान लग गया और राज्य दे दिया।
गुरु भी हमको सब बातों से छुड़ाते हैं, अपनी मत चलाओ, अपना अधिकार छोड़ो, किसी को नहीं सुधारो।
"Be like a child" इसका क्या भाव है जो गुरुजी हमें सिखाते हैं?
हमारी स्लेट एकदम क्लीन हो, किसी से कोई ईर्ष्या नहीं, राग नहीं, द्वेष नहीं, ना मेरा ना तेरा एकदम साफ Slate, एकदम निर्दोष, शुद्ध
"Be as pure as holy as your father is in heaven" - pure का क्या तात्पर्य है?
भीतर बाहर की शुद्धता - भीतर की शुद्धता आती ही विचारों से, हमारे विचार इतने साफ हो जाएं, दूजा भाव न कोई। किसी से कोई चाहना नहीं है, किसी से कोई अटैचमेंट नहीं है, केवल एक गुरु से तार जुड़ी है। है ही एक भगवान। हमारे मन में केवल गुरु का वास है, उन्हीं के विचार हैं।